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धरमजयगढ़ के ठेकेदार और गांव के जनप्रतिनिधियों की लापरवाही से कुम्हिचुंवा का बिरहोर परिवार गंदा पानी पीने को मजबूर..आखिर क्यों नही मिल रहा इन्हे योजनाओं का लाभ..

धरमजयगढ़ । क्या होगा कुम्हीचुआं के इन बिरहोर जनजातियों का…और कितना दिन पीना पड़ेगा इनको कार्बन युक्त पानी…आखिर सरकार की इतनी भारी भरकम बजट वाली योजना को पूरा करने में कौन सी परेशानी सामने आ रही है …ठेका पद्धति से चलने वाला इस योजना को ठेकेदार एवं कार्य एजेंसियां गंभीरता से क्यों नहीं ले रहा है… यह योजना मजाक का पात्र क्यों बन रहा है…

जबकि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हर घर नल से जल योजना के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2022/2023 के दौरान 3.8 करोड़ घरों में नल का जल कनेक्शन प्रदान के लिए 60000 करोड़ रूपया आवंटित किए हैं वित्त मंत्री ने भाषण देते हुए बताया कि हर घर नल से जल योजना का मौजूदा बजट 8.7 करोड़ है जिसमें से पिछले दो वर्षों में 5.5 करोड़ घरों को नल जल योजना की लाभ देने की कोशिश की गई है जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल से जल योजना का उद्देश्य हर घर को उसके परिसर आंगन में एक कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन एफ एच टी सी प्रदान करना है ताकि घर की महिलाएं पीने का पानी आसानी से प्राप्त कर सके इस योजना के साथ सरकार 20-24 तक देश के सभी नागरिकों को स्वच्छ प्रधानमंत्री की व्यवस्था के लिए स्थाई जल आपूर्ति प्रदान करना चाहती है ।

मिशन लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रदेश के साथ मिलकर काम कर रहा है राज्य में गरीबों और हासिए पर पड़े लोगों के घरों में घरेलू नल कनेक्शन की कोशिश को पूरा करने के लिए स्थिर जल आपूर्ति की मंजूरी और स्वीकृति पर जोर दिया है महामारी के दौरान एफ एच टी सी के प्रोविजन से ग्रामीण परिवारों को पानी पीने में सुविधा होगी जिससे वह पानी के लिए यहां वहां ना भटके मगर इस योजना को धरा पर उतरने में स्थानीय कार्य एजेंसी नाकाम साबित हो रहा है खास करके राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले कोरबा जनजाति के एक बस्ती कुम्हीचुआं पंचायत में जिंदगी और मौत से प्रतिदिन दो चार हो रहे हैं धरमजयगढ़ विकास खंड में पड़ने वाला कुम्हीचुआं पंचायत के इस बिरहोर बस्ती में एक मात्र बोरिंग से इन्हें कार्बन युक्त पानी मिल रहा है जिसे वह पीने को मजबूर है बिहड़ एवं समाज के मुख्य धारा से दूर रहने के कारण इन जनजातियों की स्थिति सामने आ नहीं पा रही है ।शायद कोई महामारी का इंतजार हो रहा है जिसके बाद ही कुछ कागजी खानापूर्ति होने की संभावना बनेगी

Pawel Agrawal

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