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व्यवहार न्यायालय में मजिस्ट्रेट नही होने से कार्य हो रहे प्रभावित..अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट से की मांग

डेक्स आदिवासी स्तम्भ

धरमजयगढ़। धरमजयगढ़ के सिविल न्यायालय में विगत 2 माह से मजिस्ट्रेट नहीं है वहीं मजिस्ट्रेट की नियुक्ति नहीं होने से पक्षकारों को काफी ज्यादा परेशानीयो का सामना करना पड़ रहा है।आपको बता दे मजिस्ट्रेट नहीं होने से पक्षकारों के साथ- साथ स्थानीय अधिवक्ताओं को भी परेशान होना पड़ रहा है.जिसे लेकर धरमजयगढ़ अधिवक्ता संघ ने हाईकोर्ट से न्यायधीश के पदस्थापना की मांग की है.अपने दिए ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने बताया है

कि धरमजयगढ़ में पदस्थ न्यायाधीष के अपने पद के इस्तीफा दिए जाने के बाद से पिछले 01 नवम्बर 2023 से आज पर्यन्त तक न्यायालीन कार्य का संचालन नही होने से धरमजयगढ़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों से आने वाले पक्षकारों के हितों पर प्रतिकूल असर पड रहा है। जिस कारण जिला एवं सत्र न्यायाधीष रायगढ छ०ग० प्र०क0131/एक-11-2/74 दिनांक 30 नवम्बर 2023 को धरमजयगढ का न्यायालय रिक्त होने एवं उक्त न्यायालय में लम्बित एक्षन प्लान तथा पांच वर्षो से अधिक अवधि के प्रकरणों को उच्च न्यायालय के निर्देषानुसार व्यवहार न्यायाधीष वर्ग 1 एवं वर्ग 2 घरघोडा में अन्तरित किया जा रहा है जो कि क्षेत्र के पक्षकारों के लिए व्यवहारिक नही है

तथा पक्षकारो के प्रतिकूल है।विदित हो कि व्यवहार न्यायालय धरमजयगढ जिला रायगढ छ०ग० की स्थापना सन् 1969 में धरमजयगढ क्षेत्र के जनता को सस्ता एवं सुलभ न्याय प्रदान करने के उददेष्य से हुआ है जहां दीवानी एवं फौजदारी प्रकरणों की संख्या बहुत अधिक है । प्रतिदिन पक्षकार न्याय पाने के उददेष्य से धरमजयगढ के दुर्गम इलाके से आते है तथा न्यायालय रिक्त होने के कारण बैरंग वापस लौट जाते है। इस प्रकार पक्षकारों के अधिवक्ता भी न्यायाधीष के अभाव में पक्षकारों के आगे नतमस्तक है।

Pawel Agrawal

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